शंका
- shria0
- Jun 30, 2025
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नित अर्चन और पूजन से
क्या मन का मैल मिटा?
मंदिर के जमघट, कोलाहल में
क्या शांति स्रोत मिला?
यज्ञ हवन की अग्नि से
हिय में क्या आनंद-पुष्प खिला?
एक पंडे की बड़बड़ से
क्या ज्ञान का चक्षु खुला?
कर्मकाण्डों से यदि कुछ होता
अवसाद तले मानव क्यों रोता?
जग में न होती क्लेश, वेदना
न होती जग से विलुप्त चेतना|
स्वीकार करो या करो उपेक्षा
पीड़ा का मूल सदा रहा अपेक्षा|
किया कभी क्या इस तथ्य पर चिंतन
अनुष्ठान छद्म, अपेक्षाओं का मंथन|
स्वीकार करो या करो उपेक्षा
पीड़ा न गई जब रही अपेक्षा|
हिय - हृदय
अवसाद - पीड़ा, दुख, विषाद
अनुष्ठान - कार्य जो विशेष स्थान पर, विशेष विधि से किये जाते हैं (धार्मिक कृत्य)|
छद्म - छल, असली रूप छिपाना
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- अतुल श्रीवास्तव
[फ़ोटो: पेट्रा , जॉर्डन ]



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